बीपी यानी ब्लड प्रेशर (Blood Pressure) हमारे शरीर में खून के बहने के दौरान नसों की दीवारों पर पड़ने वाला दबाव है। शरीर के हर हिस्से तक खून और ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए ब्लड प्रेशर जरूरी होता है। लेकिन जब यह दबाव लंबे समय तक सामान्य से ज्यादा रहता है, तो इसे हाई ब्लड प्रेशर या हाई BP कहा जाता है।
हाई BP एक आम स्वास्थ्य समस्या है। कई लोगों में इसके कोई साफ लक्षण दिखाई नहीं देते, इसलिए इसे कई बार “साइलेंट किलर” भी कहा जाता है। लंबे समय तक BP ज्यादा रहने पर दिल, दिमाग, किडनी और आंखों जैसी शरीर की जरूरी अंगों पर असर पड़ सकता है।
इसलिए समय-समय पर BP की जांच करवाना और इसे कंट्रोल में रखना जरूरी है।
जब हमारा दिल खून को पंप करता है, तो खून नसों के अंदर दबाव बनाता है। इसी दबाव को ब्लड प्रेशर कहते हैं।
BP की रीडिंग दो नंबरों में लिखी जाती है, जैसे 120/80 mmHg।
ऊपर का नंबर: इसे सिस्टोलिक BP कहते हैं। यह उस समय का दबाव बताता है जब दिल खून को पंप करता है।
नीचे का नंबर: इसे डायस्टोलिक BP कहते हैं। यह उस समय का दबाव बताता है जब दिल धड़कनों के बीच आराम करता है।
एक बार BP की रीडिंग ज्यादा आने का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि आपको हाई BP है। डॉक्टर आमतौर पर अलग-अलग समय पर ली गई रीडिंग और आपकी पूरी स्वास्थ्य स्थिति को देखकर फैसला करते हैं।
वयस्कों में BP की स्थिति को समझने के लिए डॉक्टर ब्लड प्रेशर की रीडिंग के साथ व्यक्ति की उम्र और दूसरी स्वास्थ्य स्थितियों को भी देखते हैं।
सामान्य तौर पर:
यह ध्यान रखना जरूरी है कि अलग-अलग गाइडलाइन में हाई BP की सीमा थोड़ी अलग हो सकती है। इसलिए केवल एक रीडिंग देखकर खुद से बीमारी का फैसला न करें।
हाई BP की सबसे बड़ी समस्या यह है कि अक्सर इसके कोई साफ लक्षण नहीं होते। कई लोगों को सालों तक पता नहीं चलता कि उनका BP बढ़ा हुआ है।
जब BP बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तो कुछ लोगों में ये लक्षण हो सकते हैं:
लेकिन इन लक्षणों को सिर्फ हाई BP से जोड़ना सही नहीं है। इनकी दूसरी वजहें भी हो सकती हैं।
अगर BP बहुत ज्यादा हो और साथ में सीने में दर्द, सांस लेने में बहुत परेशानी, बोलने में दिक्कत, चेहरे या हाथ-पैर में अचानक कमजोरी, भ्रम या देखने में अचानक परेशानी हो, तो तुरंत मेडिकल मदद लें।
ज्यादातर वयस्कों में हाई BP का कोई एक कारण नहीं होता। कई चीजें मिलकर BP बढ़ा सकती हैं।
1. ज्यादा नमक खाना
खाने में ज्यादा नमक लेने से कुछ लोगों में BP बढ़ सकता है। इसलिए खाने में नमक की मात्रा सीमित रखना जरूरी है।
2. वजन बढ़ना
ज्यादा वजन होने पर हाई BP का खतरा बढ़ सकता है। स्वस्थ वजन बनाए रखना BP को कंट्रोल करने में मदद कर सकता है।
3. कम शारीरिक गतिविधि
रोजाना बहुत कम चलना-फिरना या एक्सरसाइज न करना हाई BP के खतरे को बढ़ा सकता है।
4. तनाव
लंबे समय तक तनाव रहने से BP पर असर पड़ सकता है। हालांकि, हाई BP का कारण केवल तनाव को मानना सही नहीं है।
5. धूम्रपान और तंबाकू
धूम्रपान और तंबाकू का सेवन दिल और नसों के लिए नुकसानदायक है और BP को प्रभावित कर सकता है।
6. शराब का ज्यादा सेवन
शराब का ज्यादा सेवन BP बढ़ा सकता है और दिल से जुड़ी दूसरी समस्याओं का खतरा भी बढ़ा सकता है।
7. परिवार में हाई BP का इतिहास
अगर परिवार में माता-पिता या करीबी रिश्तेदारों को हाई BP रहा है, तो आपका जोखिम भी बढ़ सकता है।
8. कुछ बीमारियां और दवाएं
किडनी की बीमारी, हार्मोन से जुड़ी कुछ समस्याएं और कुछ दवाएं BP बढ़ा सकती हैं। इसलिए लंबे समय तक BP ज्यादा रहने पर डॉक्टर से सही कारण की जांच करवाना जरूरी है।
हाई BP का इलाज हर व्यक्ति के लिए एक जैसा नहीं होता। डॉक्टर BP की रीडिंग, उम्र, दूसरी बीमारियों और दिल से जुड़े जोखिम को देखकर इलाज तय करते हैं।
इलाज में आमतौर पर ये चीजें शामिल हो सकती हैं:
अगर केवल जीवनशैली में बदलाव से BP कंट्रोल नहीं होता या BP काफी ज्यादा है, तो डॉक्टर दवा लिख सकते हैं।
BP की दवा खुद से बंद या कम नहीं करनी चाहिए, भले ही आपको BP सामान्य महसूस हो रहा हो। दवा में बदलाव हमेशा डॉक्टर की सलाह से करें।
हाई BP से बचने और इसे कंट्रोल में रखने के लिए रोज की कुछ आदतों पर ध्यान देना जरूरी है।
1. नमक कम करें: खाने में ऊपर से ज्यादा नमक डालने और बहुत ज्यादा नमकीन पैकेज्ड फूड खाने से बचें।
2. रोज एक्टिव रहें: तेज चलना, साइकिल चलाना या डॉक्टर की सलाह के अनुसार दूसरी एक्सरसाइज करें।
3. वजन पर ध्यान दें: अगर वजन ज्यादा है, तो धीरे-धीरे स्वस्थ वजन की ओर बढ़ने की कोशिश करें।
4. तंबाकू से दूर रहें: सिगरेट, बीड़ी और दूसरे तंबाकू उत्पादों से बचें।
5. पर्याप्त नींद लें: रोज पर्याप्त और अच्छी नींद लेने की कोशिश करें।
6. BP की जांच करवाते रहें: खासकर अगर परिवार में हाई BP है या पहले BP बढ़ा हुआ आ चुका है।
अगर डॉक्टर ने घर पर BP चेक करने की सलाह दी है, तो सही तरीके से जांच करना जरूरी है।
एक ही रीडिंग के आधार पर खुद से दवा शुरू या बंद न करें।
हाई BP की पुष्टि मुख्य रूप से ब्लड प्रेशर की बार-बार जांच से की जाती है। डॉक्टर जरूरत के अनुसार कुछ दूसरी जांच भी लिख सकते हैं, जैसे:
इन जांचों का उद्देश्य सिर्फ BP देखना नहीं, बल्कि यह समझना भी होता है कि हाई BP का दिल, किडनी या शरीर के दूसरे हिस्सों पर कोई असर तो नहीं पड़ रहा।
अगर BP बहुत ज्यादा बढ़ जाए और साथ में सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी, अचानक कमजोरी, बोलने में दिक्कत, देखने में परेशानी या तेज सिरदर्द जैसे गंभीर लक्षण हों, तो इसे नजरअंदाज न करें।
ऐसी स्थिति में तुरंत नजदीकी अस्पताल या इमरजेंसी मेडिकल सेवा से संपर्क करें।
BP यानी ब्लड प्रेशर शरीर में खून के बहने के दौरान नसों पर पड़ने वाला दबाव है। यह शरीर के लिए जरूरी है, लेकिन लंबे समय तक BP ज्यादा रहने से दिल, दिमाग, किडनी और दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
हाई BP की खास बात यह है कि कई लोगों में इसके कोई साफ लक्षण नहीं होते। इसलिए समय-समय पर BP चेक करवाना जरूरी है। नमक कम करना, नियमित एक्सरसाइज, स्वस्थ वजन बनाए रखना, तंबाकू से बचना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवा लेना BP को कंट्रोल रखने में मदद कर सकता है।
अगर आपकी BP रीडिंग बार-बार ज्यादा आ रही है, तो खुद से इलाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लें। डॉक्टर की सलाह के अनुसार Pathkind Labs में ब्लड शुगर, लिपिड प्रोफाइल, किडनी फंक्शन और अन्य जरूरी जांच भी कराई जा सकती हैं।